प्रोडक्ट ब्रांड की ब्रांड बिल्डिंग वह बार-बार दोहराया जाने वाला काम है जिससे ब्रांड आसानी से नज़र आए, आसानी से पहचाना जाए और आसानी से ख़रीदा जा सके, ताकि ख़रीदारी की स्थितियों में ज़्यादा ख़रीदारों को वह याद आए और खोजने पर मिल जाए। यह प्रोडक्ट, पैक, डिस्ट्रीब्यूशन, एकरूप विज़ुअल संकेतों और मौजूदा ग्राहकों से आगे पहुंचने वाले विज्ञापन के ज़रिए होता है। ज़्यादातर नए प्रोडक्ट ब्रांड के लिए पहले 12 महीने यह साबित करते हैं कि प्रोडक्ट बिकता है; दूसरा और तीसरा साल तय करते हैं कि वह ऐसा ब्रांड बनेगा या नहीं जिसे लोग नाम लेकर ढूंढें।
यह गाइड समय के साथ अमल के बारे में है। पोज़िशनिंग, ऑडियंस और कीमत का स्तर ब्रांड रणनीति का हिस्सा हैं, जो पहले तय होनी चाहिए।
दो विचार जो ज़्यादातर बात समझा देते हैं
एहरेनबर्ग-बास इंस्टीट्यूट का शोध ब्रांड ग्रोथ को दो तरह की उपलब्धता के आधार पर समझाता है। मानसिक उपलब्धता यानी ख़रीदारी की स्थिति में ख़रीदार को आपका ब्रांड याद आने की संभावना। भौतिक उपलब्धता यानी याद आने के बाद ब्रांड को खोजना और ख़रीदना कितना आसान है। जो प्रोडक्ट याद तो रहता है पर मुश्किल से मिलता है, वह बिक्री खो देता है; जो हर जगह है पर याद नहीं रहता, वह सिर्फ़ कीमत पर मुकाबला करता है।
यही शोध विशिष्ट ब्रांड एसेट्स पर भी ज़ोर देता है: रंग, आकार, किरदार, लोगो और दूसरे संकेत जिन्हें ख़रीदार नाम पढ़े बिना आपके ब्रांड से जोड़ लेते हैं। प्रोडक्ट ब्रांड में ये एसेट्स ज़्यादातर पैक पर होते हैं, इसीलिए किसी एक कैंपेन से ज़्यादा पैकेजिंग की एकरूपता मायने रखती है।
दूसरा विचार IPA के लिए लेस बिनेट और पीटर फ़ील्ड के काम से आता है, जो लंबे समय की ब्रांड बिल्डिंग और छोटे समय की बिक्री-सक्रियता के संतुलन पर है। IPA इफ़ेक्टिवनेस डेटाबैंक के उनके विश्लेषण में पाया गया कि ब्रांड तब बेहतर करते हैं जब मिश्रण ब्रांड बिल्डिंग की ओर झुका हो, जिसे अक्सर 60:40 कहा जाता है, और सही अनुपात श्रेणी के अनुसार बदलता है। इसे निश्चित नियम नहीं, बल्कि याद दिलाने वाली बात समझें कि जो बजट सिर्फ़ मौजूदा मांग समेटने में लगता है, उसकी ग्रोथ रुक जाती है।
0–12 महीने: प्रोडक्ट को चुनना आसान बनाएं
पहले साल में प्रोडक्ट ब्रांड के पास इस्तेमाल करने लायक लगभग कोई याददाश्त नहीं होती, इसलिए काम यह है कि हर संपर्क बिंदु एक ही काम करे।
- विशिष्ट एसेट्स जल्दी तय करें। एक रंग, एक पैक संरचना और एक लोगो लॉक-अप चुनें और उन्हीं पर टिके रहें। छह महीने बाद डिज़ाइन बदलने से वह पहचान शून्य हो जाती है जिसके लिए आप अभी पैसे दे चुके हैं। इसीलिए आइडेंटिटी और पैकेजिंग पर ब्रांड बुक से ज़्यादा ध्यान देना चाहिए।
- जहां बेचते हैं, वहां जीतें। मार्केटप्लेस पर इसका मतलब है इमेज, टाइटल और रिव्यू; रिटेल में फ़ेसिंग, शेल्फ़ की जगह और वे प्रमोशन जिन्हें ख़रीदार पसंद करे। कहीं और पहुंच बढ़ाने से पहले पहले चैनल में भौतिक उपलब्धता आती है।
- प्रोडक्ट को दोहराने लायक बनाएं। जिस प्रोडक्ट को लोग दोबारा नहीं ख़रीदते, उसे कोई ब्रांड बिल्डिंग नहीं सुधार सकती। रिटर्न के कारण और रिव्यू की शिकायतें देखें और अगले प्रोडक्शन रन में सुधारें।
- अपने कॉन्टैक्ट इकट्ठा करें। इन्सर्ट, वारंटी रजिस्ट्रेशन और दोबारा ऑर्डर के ऑफ़र से ख़रीदारों की ऐसी सूची बनती है जिस तक पहुंचने के लिए हर बार किसी प्लेटफ़ॉर्म को पैसे नहीं देने पड़ते, बशर्ते आपके बाज़ार के सहमति नियमों का पालन हो।
12–24 महीने: पहुंच और उपलब्धता बढ़ाएं
जब एक चैनल स्थिर हो जाए, तो ग्रोथ मुख्यतः उन लोगों तक पहुंचने से आती है जिन्होंने अभी ख़रीदा नहीं है, मौजूदा ख़रीदारों से और निचोड़ने से नहीं।
- डिस्ट्रीब्यूशन जोड़ें। दूसरा चैनल या रिटेलर उन स्थितियों की संख्या बढ़ाता है जिनमें ब्रांड ख़रीदा जा सकता है। हर नई लिस्टिंग सिर्फ़ बिक्री का नहीं, ब्रांड बिल्डिंग का भी कदम है।
- रेंज सावधानी से बढ़ाएं। नए प्रोडक्ट को वही पैक सिस्टम और ब्रांड का वही मुख्य वादा अपनाना चाहिए। जो लाइन एक्सटेंशन किसी और ब्रांड जैसे दिखते हैं, वे पहचान बांट देते हैं। असॉर्टमेंट चरण तय करता है कि कौन से प्रोडक्ट किस क्रम में जोड़ने हैं।
- याददाश्त के लिए विज्ञापन शुरू करें, सिर्फ़ क्लिक के लिए नहीं। सर्च और मार्केटप्लेस विज्ञापन उस मांग को पकड़ते हैं जो पहले से मौजूद है। व्यापक पहुंच (वीडियो, सोशल, आउटडोर, ट्रेड में मौजूदगी) के लिए बजट का एक हिस्सा वह याददाश्त बनाता है जिससे आगे चलकर सर्च विज्ञापन सस्ते पड़ते हैं।
- बाज़ारों में ब्रांड एकरूप रखें। लेबल का अनुवाद करें, लुक वही रखें। हर देश के लिए अलग रीडिज़ाइन उन यात्रियों, ऑनलाइन ख़रीदारों और रिटेलरों के बीच पहचान घटाता है जो कई देशों में काम करते हैं।
24–36 महीने: सुरक्षा करें और बढ़त जोड़ें
तीसरे साल तक ब्रांड की ऐसी कीमत बन चुकी होती है जिसे बचाना ज़रूरी है, और नकलें दिखने लगती हैं।
- ट्रेडमार्क सुरक्षा बढ़ाएं उन देशों और क्लास तक जिनमें आप अब बेचते हैं या बेचने की योजना है। रजिस्टर्ड मार्क मार्केटप्लेस से नकलें हटवाने का आधार है।
- एसेट्स को लिखित रूप दें। लिखें कि कौन से रंग, आकार और वाक्यांश तय हैं और कौन से बदल सकते हैं, ताकि नए डिज़ाइनर और एजेंसियां भटकें नहीं।
- सिर्फ़ बिक्री नहीं, ब्रांड भी मापें। ब्रांडेड सर्च वॉल्यूम, दोबारा ख़रीदने वालों का हिस्सा, श्रेणी के ख़रीदारों में सहायता-प्राप्त पहचान और तुलनीय प्रोडक्ट के मुकाबले प्राइस प्रीमियम देखें।
- तय करें कि ब्रांड क्या नहीं करेगा। भारी डिस्काउंट, ब्रांड से हटकर श्रेणियां और कमज़ोर पार्टनर के साथ को-ब्रांडिंग छोटे समय की बिक्री के लिए लंबे समय की याददाश्त का सौदा करते हैं।
एक सरल स्कोरकार्ड
| संकेत | यह क्या दिखाता है | इसे कैसे पढ़ें |
|---|---|---|
| ब्रांडेड सर्च वॉल्यूम | खोजने वालों में मानसिक उपलब्धता | पहुंच बढ़ाने की गतिविधि के बाद ऊपर जाता रुझान अच्छा संकेत है |
| बिक्री केंद्रों या लिस्टिंग की संख्या | भौतिक उपलब्धता | प्रति केंद्र स्थिर सेल-थ्रू के साथ बढ़त |
| दोबारा ख़रीदने वालों से आए ऑर्डर का हिस्सा | प्रोडक्ट और ब्रांड से संतुष्टि | श्रेणी में ख़रीदारी की आवृत्ति पर निर्भर |
| तुलनीय प्रोडक्ट के मुकाबले कीमत | क्या ब्रांड प्रीमियम कमा रहा है | वॉल्यूम बढ़ते हुए भी कीमत टिकी रहना |
| नाम के बिना पैक की पहचान | विशिष्ट एसेट्स की ताकत | श्रेणी के ख़रीदारों पर परखें, अपने प्रशंसकों पर नहीं |
कोई एक संख्या यह साबित नहीं करती कि ब्रांड बढ़ रहा है। कम से कम दो-तीन तिमाहियों में कई संकेतों को साथ-साथ बढ़ते देखें।
जो प्रोडक्ट ब्रांड नहीं बनाता
- लगातार रीडिज़ाइन, नए लोगो और बदलते पैक रंग
- सिर्फ़ परफ़ॉर्मेंस विज्ञापन, वह भी उन लोगों के लिए जो पहले से श्रेणी खोज रहे हैं
- इतने गहरे डिस्काउंट कि ख़रीदार उनका इंतज़ार करना सीख जाएं
- वैल्यू स्टेटमेंट और स्लोगन जो प्रोडक्ट या पैक पर दिखते ही नहीं
- ब्रांड के अपने देश में उपलब्ध और याद किए जाने से पहले दूसरे देशों में विस्तार
हम कहां जुड़ते हैं
हमारे टर्नकी प्रोजेक्ट वे हिस्से तैयार करते हैं जिन पर ब्रांड बिल्डिंग टिकी है: सुरक्षित किया जा सकने वाला नाम, पैक पर तय विशिष्ट एसेट्स, रेंज प्लान और पहुंच तथा बिक्री-सक्रियता के बीच बजट बंटवारे वाला लॉन्च प्लान। लॉन्च के बाद ब्रांड का संचालन ब्रांड मालिक करता है, और रेंज विस्तार या नए बाज़ारों के लिए हम फिर साथ आ सकते हैं।
